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मक्का की खेती सम्पूर्ण जानकारी | AGTA, Cane Supervisor Exam Notes

मक्का की खेती (Maize Cultivation) – सम्पूर्ण जानकारी, पोषण महत्व, उन्नत किस्में एवं महत्वपूर्ण प्रश्न

मक्का (Maize) भारत की प्रमुख अनाज फसल है। यह कृषि परीक्षाओं जैसे UPSSSC कृषि प्रावधिक सहायक (AGTA), कृषि सुपरवाइजर, गन्ना पर्यवेक्षक, तथा अन्य कृषि परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस लेख में मक्का की वनस्पतिक, पोषणीय एवं कृषि संबंधी सम्पूर्ण जानकारी दी गई है। जो परीक्षा की दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण है।


मक्का का वैज्ञानिक परिचय

  • वानस्पतिक नाम – Zea mays
  • कुल (Family) – Poaceae (घास कुल)
  • गुणसूत्र संख्या – 2n = 20
  • उद्गम स्थान – मैक्सिको
  • फसल का प्रकार – C4 पौधा
  • परागण प्रकार – पर-परागण (Cross Pollinated)
  • अंकुरण प्रकार – Hypogeal Type

मक्का की विशेषताएँ

  • अनाजों की रानी (Queen of Cereals)
  • उच्च उत्पादन क्षमता (120 क्विंटल/हेक्टेयर तक)
  • तीनों मौसमों में उगाई जाती है – खरीफ, रबी, जायद
  • मक्का में फूल एकलिंगी होते हैं
  • मक्का में फल नहीं झड़ते

मक्का का पोषण महत्व

पोषक तत्व प्रतिशत मात्रा
प्रोटीन       10%                                 
कार्बोहाइड्रेट 76.8%
वसा 6-4%
खनिज 2%
मक्का में तेल की मात्रा 4–5%

विश्व एवं भारत में उत्पादन

  • विश्व में सर्वाधिक उत्पादन – अमेरिका
  • इसे “अमेरिका का गेहूँ” भी कहा जाता है
  • भारत के प्रमुख उत्पादक राज्य – कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश

 मक्का से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Oriented Notes)

  • मक्का में पीला रंग कैरोटिनॉइड के कारण होता है।
  • मक्का में बौनेपन का जीन ओपेक- 2 होता है।
  • मक्का मुख्य रूप से खरीफ की फसल है।
  • मक्का में "Zein" प्रोटीन पाया जाता है।
  • मक्का के तेल में विटामिन E प्रचुर मात्रा में मिलता है।
  • रबी मक्का का सर्वाधिक उत्पादन बिहार एवं उत्तर प्रदेश में होता है।
  • मक्का में जीनीया प्रभाव पाया जाता है, जिसके कारण दानों का रंग भिन्न होता है।
  • मक्का के नर पुष्प को टैसल (Tassel) तथा मादा पुष्प को सिल्क (Silk) कहते हैं।
  • संकरण  के लिए मक्का के पौध से नर पुष्प का हटाना डिटेलसिंग कहलाता है।
  • मक्का में मादा पुष्प को सिल्क एवं नर पुष्प को टैसल कहते हैं।
  • देशी मक्का का परीक्षण भार 200 और संकर मक्का का परीक्षण भार 285 ग्राम होता है 
  • मक्का का उपयोग मानव आहार, पशु आहार एवं औद्योगिक उपयोग में किया जाता है।
  • Exhaustive Crops – मक्का, ज्वार
  • सामान्य मक्का में लाइसिन एवं ट्रिप्टोफैन अमीनो अम्ल की कमी होती है।
  • QPM (Quality Protein Maize) में लाइसिन एवं ट्रिप्टोफैन की मात्रा अधिक होती है।
  • QPM में प्रोटीन की मात्रा लगभग 10% होती है।
  • मक्का Short Day Plant (SDP) है।

मक्का से संबंधित अनुसंधान एवं परियोजनाएँ

  • अखिल भारतीय समन्वित मक्का अनुसंधान परियोजना (AICRP) की स्थापना 1957 में की गई।
  • मक्का परियोजना का मुख्यालय – नई दिल्ली।
  • भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान – लुधियाना (पंजाब)।
Maize plant, maize Cultivation


SK वसल व  E विलगेस नामक वैज्ञानिकों के द्वारा CIMMYT (मैक्सिको) में  ओपेक-2 जीन का प्रयोग करके  QPM विकसित किया गया। SK वसल व E विलगेस को वर्ष 2000 में वर्ल्ड फूड प्राइज से सम्मानित किया गया। 

  

मक्का (Maize) महत्वपूर्ण किस्में 

➡ HQPM / QPM किस्में

  • श्याम
  • रत्ना
  • प्रोटीना
  • हाईस्टार

➡ संकर मक्का (Hybrid Maize)

  • संकर मक्का का विकास 1910 में सिंगल क्रॉस तकनीक द्वारा किया गया।
  • मक्का की प्रथम Hybrid किस्म – गंगा-1

➡ डबल क्रॉस तकनीक

  • डबल क्रॉस तकनीक द्वारा मक्का का संकर बीज उत्पादन 1920 में DF जोन्स द्वारा किया गया।
  • यह विधि मुख्यतः मक्का में अपनाई जाती है।
  • डबल क्रॉस तकनीक भारत में अधिक प्रचलित है।

➡ भारत में मक्का अनुसंधान

  • भारत में सर्वप्रथम मक्का पर कार्य 1957 में ICAR के अंतर्गत प्रारम्भ हुआ।
  • गंगा-1, गंगा-101 एवं रंजन किस्में 1961 में निकाली गई।
Exhaustive Crop (अत्यधिक पोषक तत्व लेने वाली फसल) मक्का एक Exhaustive फसल है, जो मिट्टी से अधिक मात्रा में पोषक तत्व अवशोषित करती है।

 

मक्का का वर्गीकरण (किस्म के अनुसार)

मक्का के दाने के गुणों के आधार पर इसे 7 भागों में बांटा गया है:

1. ज़िया मेज़ (Var. Indentata)

  • इसे डेंट कॉर्न भी कहते हैं।
  • यह भारत में व्यापक रूप से उगाया जाता है।

2. ज़िया मेज़ (Var. Indurata)

  • इसे फ्लिंट कॉर्न भी कहते हैं।
  • दाने कठोर होते हैं।
  • यह अमेरिका में अधिक उगाया जाता है।

3. ज़िया मेज़ (Var. Everta)

  • इसे पॉपकॉर्न भी कहते हैं।
  • गर्म करने पर दाना फूटता है।
  • पॉपकॉर्न बनाने में उपयोग किया जाता है।
  • लगभग 180°C पर गर्म करने से फूटता है।

4. ज़िया मेज़ (Var. Tunicata)

  • इसे पॉड कॉर्न भी कहते हैं।
  • यह प्राचीन मक्का की किस्म है।
  • आधुनिक मक्का की उत्पत्ति इसी से मानी जाती है।

5. ज़िया मेज़ (Var. Ceratina)

  • इसे वैक्सी कॉर्न भी कहते हैं।
  • इसमें स्टार्च की मात्रा अधिक होती है।

6. ज़िया मेज़ (Var. Saccharata)

  • इसे स्वीट कॉर्न कहते हैं।
  • इसमें 10–32% तक शर्करा पाई जाती है।
  • SH जीन उपस्थित होता है।
  • विटामिन A और C प्रचुर मात्रा में होते हैं।
  • हरी अवस्था में सब्जी के रूप में उपयोग।

7. ज़िया मेज़ (Var. Amylacea)

  • इसे फ्लोर कॉर्न कहते हैं।
  • आटा बनाने में उपयोग किया जाता है।
  • लगभग 70% स्टार्च पाया जाता है।
  • दक्षिण अमेरिका में अधिक प्रचलित।

मक्का की खेती: जलवायु, मिट्टी, बीज दर एवं बुवाई

जलवायु (Climate)

  • उष्ण एवं अर्द्ध-उष्ण जलवायु उपयुक्त।
  • आदर्श तापमान: 25°–30°C
  • वृद्धि के लिए उपयुक्त तापमान: 32°C
  • अंकुरण के लिए उपयुक्त तापमान: 21°C
  • अच्छी उपज हेतु 60–70% आर्द्रता उपयुक्त।

मिट्टी (Soil)

नमीयुक्त दोमट या जीवांश युक्त दोमट मिट्टी सर्वश्रेष्ठ।

बीज दर (Seed Rate)

  • संकर मक्का: 20–25 किग्रा/हेक्टेयर
  • देशी/संकुल मक्का: 18–20 किग्रा/हेक्टेयर (खरीफ) रबी मक्का: 25–30 किग्रा/हेक्टेयर
  • बेबी कॉर्न: 22–25 किग्रा/हेक्टेयर
  • दाने हेतु: 20 किग्रा/हेक्टेयर
  • चारे हेतु: 40–45 किग्रा/हेक्टेयर
  • मीठी मक्का: 8 किग्रा/हेक्टेयर
  • पॉपकॉर्न: 10 किग्रा/हेक्टेयर

पौधों की दूरी

60 × 25 सेमी (लगभग 66,666 पौधे प्रति हेक्टेयर)

बीज की गहराई

3–5 सेमी

एक हेक्टेयर में लगभग 65,000–70,000 पौधों की संख्या रखी जाती है।

 बुवाई का समय

  • मानसून प्रारंभ: 15 जून – 20 जून
  • खरीफ: जून – जुलाई
  • रबी: अक्टूबर – नवम्बर
  • जायद: फरवरी – मार्च

बुवाई की विधियाँ

  • 1. हल द्वारा
  • 2. कूंड विधि
  • 3. डिबलिंग विधि
  • मक्का में बुवाई हेतु यंत्र: सीड प्लांटर

बीजोपचार-

उत्तम गुणवत्ता का बीज बोएँ तथा उपयुक्त फफूंदनाशी से बीज उपचार करें।

मक्का की खेती – सिंचाई, किस्में एवं उर्वरक प्रबंधन

 सिंचाई (Irrigation)

  • मक्का को 3–4 सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  • फसल की कुल जल आवश्यकता: 500–800 मि.मी.
  • सिंचाई की महत्वपूर्ण अवस्थाएँ:
    • घुटना अवस्था (40–45 दिन)
    • परागण अवस्था
    • दाना भरने की अवस्था (लगभग 70 दिन)

 प्रमुख किस्में (Maize Varieties)

🔹 संकर किस्में

  • गंगा-1 (भारत में विकसित प्रारंभिक संकर)
  • गंगा संकर-2
  • गंगा-4
  • हिम 123
  • रणजीत, संगम

🔹 पीली दाना वाली किस्में

  • दक्कन-101
  • गंगा-101
  • गंगा-5
  • हिम-123
  • VL-54
  • राजलक्ष्मी

🔹 सफेद या देशी किस्में

  • नवीन
  • प्रताप
  • मालवीय
  • विजय
  • आनंद
  • प्रभात

🔹 मीठी मक्का

  • मधुरी
  • सुगरी
  • प्रिया

🔹 पॉपकॉर्न किस्में

  • प्रभा मक्का-6
  • अंकुर

🔹 अधिक प्रोटीन वाली (QPM)

  • HQPM-1
  • HQPM-5
  • शक्ति प्रोटीन
  • शक्तिमान-1
  • शक्तिमान-2

उर्वरक प्रबंधन (Fertilizer Dose)

पोषक तत्व सिंचित (किग्रा/हेक्टेयर) असिंचित (किग्रा/हेक्टेयर)
नाइट्रोजन (N) 90–120 60–80
फास्फोरस (P) 40–60 30
पोटाश (K) 40 20
जिंक (Zn) 25 20

N → वानस्पतिक वृद्धि के लिए आवश्यक
P → जड़ विकास हेतु
K → रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है

🌾 खरपतवार नियंत्रण (Weed Management)

  • सवा, दूबघास, जंगली चौलाई तथा हजारदाना इसके प्रमुख खरपतवार हैं।
  • 2–3 निराई-गुड़ाई आवश्यक।
  • एट्राजीन (PE) का प्रयोग किया जाता है।
  • 2,4-D का प्रयोग चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार नियंत्रण हेतु।

मक्का के मुख्य रोग एवं कीट

 प्रमुख रोग (Diseases of Maize)

1. मक्का में सफेद कलिका

  • यह रोग जिंक की कमी के कारण होता है।
  • इसमें पत्तियों पर सफेद रंग की धारियाँ दिखाई देती हैं।
  • रोकथाम के लिए जिंक सल्फेट @ 20–25 किग्रा/हेक्टेयर बुवाई के समय प्रयोग करें।

2. तुलासिता (Downy Mildew)

  • पत्तियों पर पीली धारियाँ पड़ जाती हैं।
  • रोकथाम हेतु जिंक सल्फेट 80% @ 2 किग्रा/हेक्टेयर का प्रयोग।
  • बीज उपचार: मेटालैक्सिल 4 ग्राम/किग्रा बीज।

3. पत्ती धब्बा (Leaf Spot)

  • पत्तियों पर बड़े या अनियमित धब्बे दिखाई देते हैं।
  • रोकथाम के लिए जिंक मैंगनीज सल्फेट 2 किग्रा 80% घोल का छिड़काव।

4. तना सड़न (Stem Rot)

  • नियंत्रण हेतु 1.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम या
  • 0.6 ग्राम थायोफेनेट मिथाइल + 500 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव।

प्रमुख कीट (Major Insects of Maize)

1. तना छेदक (Stem Borer) – Chilo partellus

  • यह मक्का का प्रमुख हानिकारक कीट है।
  • इसकी लार्वा अवस्था फसल को अधिक नुकसान पहुँचाती है।
  • पौधे की ऊपरी पत्तियाँ सूख जाती हैं, जिसे Dead Heart कहते हैं।
  • नियंत्रण: कार्बोफ्यूरान 3G @ 15–20 किग्रा/हेक्टेयर का प्रयोग।

2. मक्का शूट फ्लाई (Atherigona orientalis)-

  • नई पौध अवस्था में अधिक नुकसान करती है।
  • अंडे पत्तियों की निचली सतह पर देती है।
  • 6–7 दिन बाद लार्वा पत्तियों में प्रवेश कर क्षति पहुँचाते हैं।
  • Dead Heart लक्षण दिखाई देते हैं।

3. टिड्डा (Grasshopper)-

  • पत्तियों को खाकर नुकसान पहुँचाता है।
  • नियंत्रण हेतु मेलाथियान 20% EC @ 2.5 लीटर/हेक्टेयर का छिड़काव।

 थिनिंग (Thinning)

अनावश्यक पौधों को निकालकर उचित दूरी बनाए रखना थिनिंग कहलाता है।

थिनिंग प्रतिशत: सामान्यतः मक्का में 80–85% पौधे बनाए रखते हैं।

सूत्र 👉 थिनिंग % = (बचे पौधे / कुल पौधे) × 100

मक्का की कटाई अवस्था

  • चारागाही मक्का: 60–65 दिन बाद कटाई
  • देसी किस्म: 75–85 दिन बाद
  • संकर (Hybrid): 90–115 दिन बाद
  • कटाई के समय दाने में नमी लगभग 25% होनी चाहिए।
  • भंडारण के लिए नमी 20% या कम होनी चाहिए।

उत्पादन (Yield)

  • देसी: 40–50 क्विंटल/हेक्टेयर
  • संकर: 50–60 क्विंटल/हेक्टेयर
  • उन्नत: 300–400 क्विंटल/हेक्टेयर (हरी चारा)
  • भारत में औसत उत्पादन: लगभग 2.75 टन/हेक्टेयर

भंडारण (Storage)

  • दाने में 10–12% नमी रहने पर सुरक्षित भंडारण किया जाता है।

मक्का से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ)

1. मक्का की बुवाई का सही समय क्या है?

खरीफ मौसम में जून–जुलाई मक्का बुवाई का सबसे उपयुक्त समय है। रबी में अक्टूबर–नवंबर तथा जायद में फरवरी–मार्च में बुवाई की जाती है।

2. मक्का की बीज दर कितनी होनी चाहिए?

संकर (Hybrid) मक्का के लिए 20–25 किग्रा प्रति हेक्टेयर तथा देशी किस्मों के लिए 18–20 किग्रा प्रति हेक्टेयर बीज दर उपयुक्त है।

3. मक्का की उपज कितनी होती है?

संकर मक्का की औसत उपज 50–60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तथा देशी किस्मों की 30–40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।

4. मक्का में सबसे अधिक कौन सा उर्वरक आवश्यक है?

मक्का में नाइट्रोजन (N) की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। इसके साथ फास्फोरस (P) और पोटाश (K) संतुलित मात्रा में देना चाहिए।

5. मक्का की प्रमुख कीट और रोग कौन-कौन से हैं?

प्रमुख कीट: तना छेदक (Stem Borer), शूट फ्लाई।
प्रमुख रोग: सफेद कलिका रोग (White Bud), पत्ती झुलसा रोग।

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