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ज्वार की वैज्ञानिक खेती: बुवाई समय, रोपण दूरी, खाद, रोग-कीट एवं उपज (UPSSSC AGTA Notes)

ज्वार (Sorghum bicolor) सम्पूर्ण नोट्स – Agriculture Exam | AGTA | Cane Supervisor

यह नोट्स विशेष रूप से UPSSSC Agriculture Exam, AGTA (कृषि प्राविधिक सहायक) एवं Cane Supervisor तथा अन्य कृषि परीक्षाओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। कोई भी परीक्षा हो ज्वार से 1-2 प्रश्न पूछे ही जाते हैं।


 ज्वार का वानस्पतिक विवरण (Botanical Classification )

वानस्पतिक नाम         Sorghum bicolor         
कुल Poaceae (Gramineae)
उत्पत्ति अफ्रीका
फल कैरीओप्सिस
गुणसूत्र संख्या 2n = 20
अंकुरण Hypogeal

ज्वार में HCN (धूरीन /प्रूसिक अम्ल)

UPSSSC AGTA एवं Cane Supervisor परीक्षा में HCN से प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

  • HCN विषैला तत्व है।
  • कोमल पत्तियों में अधिक पाया जाता है।
  • 200 ppm – क्रांतिक मात्रा
  • 500 ppm – पशुओं के लिए घातक
  • अधिक नाइट्रोजन देने से HCN बढ़ता है।

पोषण संरचना (Nutrition Value of Jowar)

  • कार्बोहाइड्रेट – 70%
  • प्रोटीन – 10–12%
  • वसा – 3.3%

Agriculture Exam में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण तथ्य

  • ज्वार एक C4 पौधा है।
  • यह Short Day Plant है।
  • इसे मोटे अनाजों का राजा कहा जाता है।
  • सूखा सहनशील फसल है इस लिए इसे केमल क्राप (Camel Crop) कहते हैं।
  • ज्वार में लाइसिन अमीनो अम्ल की कमी होती है। ल्यूसिन एमिनो अम्ल की अधिकता होती है, जो विटामिन B के निर्माण को बंद कर देता है, जिससे पेलेग्रा रोग हो जाता है।
  • ज्वार की मीठी किस्मों में 16-17% सुक्रोज होता है।
  • साइलेज बनाने के लिए फसल की कटाई बुबाई के 60 दिन बाद करते हैं।

Soil (मिट्टी)

काले दोमट मृदा, अच्छी जल निकास वाली, pH 6.0 – 8.5 होना चाहिए।

दाने के लिए उपयुक्त किस्में

  • CSH-1 – ज्वार की प्रथम संकर किस्म, वर्ष 1964 में विकसित।
  • CSH-9 – सबसे अधिक दाना सहनशील किस्म।
  • CSV-15 – चारे व दाने दोनों के लिए उपयुक्त।
  • SPV-245 – एन्थ्रेक्नोज के प्रति सहनशील किस्म।

मध्यम अवधि किस्में

CSH-5, CSH-6, CSH-14, SPH-468, CSH-13, SPV-96, SPV-346, CSV-10, CSV-13 (SPV-475), CSV-15, प्रताप ज्वार-1430

संकर किस्में

CSH-1, 2, 3, 4, 5, 6, 9, 10

चारे के लिए उपयुक्त किस्में

  • राजा/चरी-1 – अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
  • राजा/चरी-2 – कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
  • SSG (मीठा सूडान)
  • हरा सोना-855
  • लंबे पौधे – FSH-92079
  • UP चरी-615
  • CSH-20-MF (UPMCH-1101)

कटाई के आधार पर किस्में

  • एक कटाई लेने वाली – PC-6, 9, 23; HC-171, 260, 136; UP चरी-1,2; राजचरी-1,2
  • दो कटाई लेने वाली – CO-27, AS-16
  • तीन से अधिक कटाई – SSG-980, 890, 855
  • बहु कटाई – मीठा सुडान (SSG-59-3)
  • सिंचित क्षेत्र के लिए – M-35-1
  • नया बंध किस्म – Combine Kafir-60
  • सूखा प्रतिरोधी किस्म – BC-9
  • बीज व फसल प्रतिरोधी – CSV-17 (संकर)

Seed Rate (बीज दर)

  • अनाज के रूप में उत्पादन हेतु – 12-15 kg/ha
  • चारे के लिए – 30-40 kg/ha
  • चारा व दाना दोनों हेतु – 15-20 kg/ha

बुवाई की गहराई: 3-4 सेमी

रोपण दूरी (Spacing)

किस्म कतार से कतार दूरी पौधे से पौधे दूरी
सामान्य किस्म 45 सेमी 12-15 सेमी
संकर (Hybrid) 60 सेमी 15-20 सेमी
चारा ज्वार 25-30 सेमी 10-12 सेमी


बुवाई का समय (Sowing Time)

  • खरीफ ज्वार: जून से जुलाई
  • रबी ज्वार: सितंबर से अक्टूबर (दक्षिण भारत)
  • उत्तर भारत में उपयुक्त समय: 15 जून – 15 जुलाई

सिंचाई प्रबंधन (Irrigation)

  • 2-3 सिंचाई पर्याप्त
  • पहली – 20-25 दिन बाद
  • दूसरी – फूल अवस्था पर
  • तीसरी – दाना भरने की अवस्था
  • जलभराव से बचाव आवश्यक

खाद एवं उर्वरक (Fertilizer Management)

  उर्वरक तत्व        मात्रा (किग्रा/हेक्टेयर)
नाइट्रोजन (N) 80-100।                                        
फास्फोरस (P₂O₅) 40-50
पोटाश (K₂O) 40

प्रयोग विधि: पूरी फास्फोरस व पोटाश + आधी नाइट्रोजन बुवाई के समय, शेष नाइट्रोजन 30-35 दिन बाद।

खरपतवार नियंत्रण (Weed Control)

  • 20-25 दिन बाद पहली निराई
  • 35-40 दिन बाद दूसरी निराई
  • एट्राजीन 0.5-1.0 किग्रा/हेक्टेयर (बुवाई के बाद)

मुख्य रोग (Major Diseases)

रोग                    लक्षण                                 
दाना कंड दाने की जगह काला चूर्ण
पत्ती झुलसा पत्तियों पर भूरे धब्बे
चारकोल रॉट तना अंदर से काला


मुख्य कीट (Major Pests)

कीट                        हानि                                 
तना छेदक तना अंदर से खोखला
माहू रस चूसकर पौधा कमजोर
शूट फ्लाई केंद्रीय पत्ती सूख जाती है


उपज (Yield)

प्रकार           औसत उपज (क्विंटल/हेक्टेयर)
देशी किस्म 10-15
संकर किस्म 35-45
हरे चारे की उपज 400-500 (हरा चारा)

कटाई एवं भंडारण (Harvesting & Storage)

  • दाने कठोर होने पर कटाई
  • दाने में 12-15 % नमी रहने पर भंडारित करते हैं।
  • सूखे एवं साफ गोदाम में भंडारण
  • नीम पत्ती या एल्यूमिनियम फॉस्फाइड का प्रयोग

ज्वार की खेती से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQ)

Q-1. ज्वार की बीज दर कितनी होती है?

ज्वार की बीज दर सामान्यतः 12–15 किग्रा प्रति हेक्टेयर होती है। संकर किस्मों में बीज दर थोड़ी कम रखी जाती है।

Q-2. ज्वार में HCN (हाइड्रोसायनिक अम्ल) किस अवस्था में पाया जाता है?

ज्वार की कोमल अवस्था (विशेषकर 40-45 दिन तक की फसल) में HCN (Hydrocyanic Acid) की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो पशुओं के लिए हानिकारक हो सकती है।

Q-3. ज्वार का सर्वाधिक उत्पादन किस राज्य में होता है?

भारत में ज्वार का सर्वाधिक उत्पादन सामान्यतः महाराष्ट्र राज्य में होता है।

Q-4. ज्वार की फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?

ज्वार की फसल सामान्यतः 45–55 दिन में फूल अवस्था में पहुंचती है और 90–110 दिन में पककर तैयार हो जाती है (किस्म के अनुसार अंतर हो सकता है)।

Q-5. ज्वार का प्रमुख कीट कौन-सा है?

ज्वार का प्रमुख कीट शूट फ्लाई (Atherigona soccata) है, जो प्रारंभिक अवस्था में पौधे के केंद्रीय भाग को नुकसान पहुंचाता है।

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