फसल चक्र, फसल सघनता व फसल चक्र सघनता
इस लेख में हम फसल चक्र के सिद्धांत, फसल सघनता, फसल चक्र सघनता की परिभाषा, तथा इनके उदाहरणों सहित विस्तृत व्याख्या करेंगे। यदि आप कृषि की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं या competitive exams जैसे UPSSSC AGTA, CANE SUPERVISOR के लिए महत्वपूर्ण नोट्स ढूंढ रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए अत्यंत उपयोगी होगा।
भारतीय कृषि में उत्पादन बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और लागत कम करने के लिए फसल चक्र एवं विभिन्न फसल प्रणालियों का विशेष महत्व है। आधुनिक समय में सतत कृषि (Sustainable Agriculture) के लिए फसल चक्र, बहु-फसली प्रणाली, एकीकृत फसल प्रणाली, प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को अपनाना आवश्यक हो गया है।
फसल चक्र (Crop Rotation) क्या है?
फसल चक्र वह कृषि पद्धति है जिसमें एक ही खेत में अलग-अलग मौसम या वर्षों में विभिन्न फसलों को निश्चित क्रम में उगाया जाता है। फसल चक्र से तात्पर किसी निश्चित क्षेत्र में निश्चित समय के अंतर्गत फसलों को अदल बदल कर बोया जाना फसल चक्र कहलाता है सफल चक्र से मृदा की उर्वरता व उत्पादकता में सुधार होता है।
उदाहरण:
- 1 वर्षीय - धान → गेहूं
- 2 वर्षीय - धान → गेहूं → चना→बाजरा
- 3 वर्षीय - मक्का → चना → मूंगफली→कपास/मटर
फसल चक्र के मुख्य उद्देश्य:
- मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना
- कीट एवं रोग नियंत्रण
- उत्पादन में वृद्धि
- रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम करना
फसल चक्र (Crop Rotation) के लाभ
- मृदा उर्वरता व मृदा उत्पादकता में वृद्धि होती है।
- मिट्टी की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशाओं में सुधार होता है।
- खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है।
- लगातार एक ही फसल को बार-बार उगाने से उस फसल के खरपतवार बढ़ जाते हैं, लेकिन फसल चक्र अपनाने से यह समस्या कम हो जाती है।
- लगातार गेहूँ की खेती करने से खरपतवार अधिक बढ़ते हैं, जबकि फसल परिवर्तन करने से उनकी वृद्धि कम होती है। जैसे➡ 1. बरसीम केे लगातार बोने से कासनी में वृद्धि। 2. गेहूं के लगातार बोने से गेहूंसा (मामा) खरपतवार में वृद्धि।
- खेती संसाधनों का पूर्ण उपयोग होता है।
- फसल चक्र से किसान की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।
- चारा संरक्षण में सहायता मिलती है।
- दलहनी फसलों द्वारा मृदा संरक्षण में वृद्धि होती है।
- फसलों के उत्पादन की गुणवत्ता में वृद्धि होती है।
- फसल चक्र अपनाने से मृदा में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है।
- फसल चक्र अपनाने से मृदा थकान नहीं होती।
वर्षीय फसल चक्र (उदाहरण):
- मक्का – चना
- धान – गेहूँ – चना
- मूंग – सरसों
- मक्का – मूंग (जायद) – चना
द्विवर्षीय फसल चक्र:
- मूंगफली – गेहूँ – मक्का – चना
- मक्का – मूंग (जायद) – चना – धान
- धान – मटर – गन्ना
- गन्ना – मूंग – गेहूँ
त्रिवर्षीय फसल चक्र:
- गन्ना – धान – गेहूँ – मक्का – चना
- मक्का – चना – धान – गेहूँ – अरहर – जौ
फसल चक्र के सिद्धांत:
1. दलहनी फसलों का समावेश: दलहन वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करती हैं। दलहनी फसलों की जड़ों में राइजोबियम जीवाणु पाया जाता है। जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है। जिससे मृदा में N का स्तर सुधरता है।3. अधिक व कम पोषक तत्व लेने वाली फसलें: इस सिद्धांत के द्वारा मृदा में पोषक तत्वों का दोहन होने के बाद इस सिद्धांत से पोषक तत्वों का संतुलन बनाकर रखा जाता है।
फसल सघनता (Crop Intensity) क्या है?
फसल सघनता से तात्पर्य किसी क्षेत्र में एक वर्ष के दौरान बोई गई कुल फसलों की संख्या से है। यह बताता है कि किसी भूमि का कितनी बार उपयोग खेती के लिए किया गया है।
वह कुल क्षेत्रफल जिसमें एक वर्ष में एक से अधिक बार खेती की जाती है, उसे सकल बोया गया क्षेत्रफल (Gross Cropped Area) कहते हैं। यदि किसी भूमि पर दो या तीन बार फसल उगाई जाती है, तो हर बार का क्षेत्र इसमें जोड़ा जाता है।
उदाहरण: लगभग 211 मिलियन हेक्टेयर (mha)
Net Cropped Area (शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल):
वह वास्तविक क्षेत्रफल जिसमें कम से कम एक बार खेती की जाती है, उसे शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल (Net Cropped Area) कहते हैं। इसमें भूमि को केवल एक बार गिना जाता है, चाहे उस पर कितनी भी बार फसल ली जाए।
उदाहरण: लगभग 139 मिलियन हेक्टेयर (mha)
भारत में फसल सघनता (2022 के अनुसार):
कृषि सांख्यिकी रिपोर्ट 2022 के अनुसार भारत में Net Cropped Area लगभग 139 mha तथा Gross Cropped Area लगभग 211 mha है।
फसल सघनता = (211 / 139) × 100 ≈ 151%
फसल सघनता का महत्व:
- भूमि उपयोग की दक्षता को दर्शाता है।
- कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।
- कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग को दर्शाता है।
- देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण संकेतक है।
फसल चक्र सघनता (Crop Rotation Intensity) क्या है?
फसल चक्र सघनता से तात्पर्य किसी निश्चित समय अवधि (आमतौर पर 1 वर्ष) में एक ही खेत में ली गई फसलों की संख्या से है। यह बताती है कि भूमि का कितनी बार उपयोग किया गया है। फसल चक्र सफलता निकलते समय निम्न बातों का ध्यान रखा जाता है।
- फसल चक्र सघनता हमेशा पूरे वर्ष की निकलती है। (1,2,3 वर्ष)
- फसल चक्र सघनता में 6 माह, 18 माह 18 माह व 30 माह को क्रमश 1 वर्ष, 2 वर्ष, 3 वर्ष में Convert किया जाता है।
- फसल चक्र सघनता में मिश्रित फसल को एक ही फसल में Count किया जाता है। Ex- चना+सरसौं+गेहूं
- हरा चारा फसल को फसल चक्र सघनता में Count नहीं करते लेकिन समय को Count करते हैं।
- पडती छोड़ी गई जमीन का समय काउंट किया जाता है।
- गन्ना फसल को हमेशा 12 महीने में में तथा पेड़ी गन्ना को 18 माह में काउंट किया जाता है।
- मूंग फसल खरीफ की फसल है इसे 6 माह में काउंट करें जब तक की लिखा नहीं गया हो (जायद/हरी खाद)।
गणना कैसे की जाती है?
फसल चक्र सघनता की गणना करते समय निश्चित अवधि (जैसे 12 माह) में उगाई गई कुल फसलों की संख्या को ध्यान में रखा जाता है।
यदि 6 माह में 1 फसल तथा 12 माह में 2 फसल ली जाती है, तो उसी के अनुसार सघनता निर्धारित की जाती है।
फसल चक्र सघनता का सूत्र (Crop Rotation Intensity Formula)
फसल चक्र सघनता भूमि उपयोग की दक्षता को दर्शाती है और कृषि उत्पादन क्षमता का महत्वपूर्ण सूचक है।
उदाहरण -
2/1*100= 200%
महत्व:
- भूमि उपयोग की दक्षता को दर्शाता है।
- कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।
- किसानों की आय वृद्धि में मदद करता है।
- फसल प्रबंधन की योजना बनाने में उपयोगी है।



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