जौ (Barley) : कृषि परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण नोट्स
जौ (Barley) एक महत्वपूर्ण रबी फसल है, जिससे संबंधित प्रश्न UPSSSC AGTA, Cane Supervisor, AFO, ADO सहकारिता तथा अन्य कृषि परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। जोकि प्रतियोगी परिक्षाओं की दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण हैं।
🔹 जौ (Barley) – सामान्य जानकारी
- उत्पत्ति : इथोपिया (द.प. एशिया)
- कुल : ग्रेमिनी (पोएसी)
- परागण : स्व-परागित फसल
- गुणसूत्र संख्या : 2n = 14
🔹 दाने की संरचना एवं संघटन
- जौ के दानों में नमी लगभग 12% होती है
- प्रोटीन 11–5% (एल्ब्युमिनॉइड के रूप में)
- कार्बोहाइड्रेट लगभग 75% पाए जाते हैं
- जौ के दाने को केरियोप्सिस कहते हैं
- पुष्पक्रम को स्पाइक या हेड कहते हैं
🔹 फसल विशेषताएँ
- लवणता एवं क्षारीयता के प्रति सहनशील फसल है
- जौ में स्टार्च माल्ट के रूप में होता है
- जौ से एल्कोहल, यीस्ट एवं बीयर बनाई जाती है
🔹 जैव-प्रौद्योगिकी से संबंधित तथ्य
- Bulbosum technique का उपयोग Doubled Haploid (DH) barley उत्पादन हेतु किया जाता है
- इसमें Chromosome elimination technique का प्रयोग होता है
🔹 विशेष जानकारी
- Lugdi – हिमाचल में जौ या चावल से बनी स्थानीय कच्ची बीयर
🔹 जलवायु (Climate)
- जौ एक शीतोष्ण जलवायु की फसल है
- भारत में उत्तर प्रदेश जौ के क्षेत्रफल एवं उत्पादन में प्रथम स्थान पर है
जौ (Barley) : प्रकार, किस्में एवं बीज दर
🔹 1. होर्डियम वल्गेयर (Six Rowed Barley)
- यह छह पंक्तियों वाली जौ है
- सभी तीन स्पाइकलेट उपजाऊ होते हैं
- छह अलग-अलग पंक्तियों में स्पाइकलेट को रैचिस के चारों ओर समान दूरी पर व्यवस्थित किया जाता है
- सभी पुष्पों के लेम्मा पर हूड (Awns) होते हैं
- भारत में इस समूह की सबसे अधिक खेती की जाती है (ICAR / NET – 2002)
🔹 2. होर्डियम डिस्टिकन (Two Rowed Barley)
- इसमें केवल दो पंक्तियों वाली जौ होती है
- केवल मध्य स्पाइकलेट उपजाऊ होता है
🔹 3. होर्डियम इरेगुलेयर (Irregular Barley)
- इस प्रजाति में दो पंक्ति या छह पंक्तियों वाली बालियाँ पाई जाती हैं
🔹 जौ की किस्में (Varieties)
1. सामान्य किस्में
- RS-6
- अंबर
- आजाद
- करण
- केदार
- कैलाश
- ज्योति
- रत्ना
2. मोल्या निमेटोड रोग रोधी किस्में
- RD-2035
- RD-2052
- RDB-1
- RD-387 (राजकिरण)
3. लवणता सहनशील किस्में
- RD-2552
- BL-2 (बिलाड़ा-2)
- आजाद
4. छिलका रहित (Husk less) किस्में
- डोलमा
- करण-3
- हिमानी
5. माल्ट के लिए किस्में
- अंबर
- RD-137
- RS-6
- क्लिपर
6. उत्परिवर्तित (Mutant) किस्में
- BM-4 (IARI, दिल्ली द्वारा विकसित)
🔹 बीज दर (Seed Rate)
- 100 किग्रा / हेक्टेयर
🔹 बुवाई समय (Sowing Time)
15 अक्टूबर से 15 नवम्बर
जौ (Barley) : दूरी, उर्वरक, खरपतवार एवं रोग
🔹 दूरी (Spacing)
- कतार से कतार की दूरी – 22.5 सेमी
- पौधे से पौधे की दूरी – 10 सेमी
🔹 उर्वरक (Fertilizers)
- N : P : K = 60 : 30 : 20 किग्रा/हे.
- अधिक उत्पादन हेतु गेहूँ, जौ, बाजरा की फसल में थायो यूरिया घोल 500 ppm (0.5 ग्राम/लीटर पानी) की दर से फूटान के समय या फूल आने पर छिड़काव करें
- असिंचित क्षेत्र में सभी उर्वरकों की पूरी मात्रा बुवाई के साथ दें
🔹 रोग (Diseases)
1. आवृत कण्डवा (Covered Smut)
- कारक : अस्टिलागो हॉर्डेई नामक कवक
- जौ की मुख्य बीमारी है
- नियंत्रण : बाविस्टीन या वीटावैक्स 3 ग्राम/किग्रा बीज को उपचारित करें
2. धारिदार रोग (Stripe Disease)
- कारक : हेल्मिन्थोस्पोरियम ग्रामिनियम कवक
- यह एक बीज जनित (Seed borne) रोग है
- नियंत्रण : कैप्टान 3 ग्राम/किग्रा बीज को उपचारित करें
3. ब्लॉच (Purple Blotch)
- कारक : हेल्मिन्थोस्पोरियम स्पेसीज कवक
4. मोल्या रोग
- कारक : हेटेरोडेरा एवेनी सूत्रकृमि
- नियंत्रण हेतु फसल चक्र अपनाएँ
- मोल्या रोग रोधी किस्में अपनाएँ – RD-387 (राजकिरण), RD-2035, RD-2052, RDB-1
'जौ' से संबंधित महत्वपूर्ण बिन्दु (कृषि परीक्षाओं के लिए उपयोगी)
| क्रम संख्या | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | जौ के पुष्पक्रम को कहते हैं | स्पाइक या हेड |
| 2 | जौ में स्टार्च के रूप में पाया जाता है | माल्ट |
| 3 | जौ की बीज दर होती है | 75–100 किग्रा/हे. |
| 4 | मोल्या निमेटोड रोगरोधी किस्में हैं | RD-387 (राजकिरण), RD-2035, RD-2052, RDB-1 |
| 5 | लवणता सहनशील किस्में हैं | BL-2, RD-2552 |
| 6 | जौ की सिक्स रो प्रजाति है | आज़ाद, ज्योति |
| 7 | जौ की उत्परिवर्तित (Mutant) किस्म है | BM-4 (IARI, दिल्ली) |
| 8 | जौ के प्रमुख रोग हैं | आवृत कण्डवा, धारिदार रोग, मोल्या, ब्लॉच |
| 9 | जौ की फसल में “मोल्या रोग” फैलता है | निमेटोड (हेटेरोडेरा एवेनी) द्वारा |
| 10 | लवणता व क्षारीयता के लिए सहनशील फसल है | जौ एवं सरसों |
| 11 | जौ में धारिदार रोग किससे होता है | हेल्मिन्थोस्पोरियम ग्रामिनियम |
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